पृथ्वी का प्रथम वायुमंडल, जिसे आदिम वायुमंडल (primordial atmosphere) भी कहा जाता है, आज के वायुमंडल से बिलकुल भिन्न था। इसकी उत्पत्ति (उत्पत्ति - origin) लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले, पृथ्वी के निर्माण (formation) के समय हुई थी।
उत्पत्ति (Origin - ओरिजिन):
पृथ्वी का प्रारंभिक वायुमंडल संभवतः उन गैसों से बना था जो पृथ्वी के निर्माण के दौरान निकली थीं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रक्रियाएँ शामिल थीं:
संरचना (Composition - कंपोजिशन):
शुरुआती वायुमंडल की संरचना इस प्रकार थी:
मुख्य गैसें:
ऑक्सीजन (Oxygen) की अनुपस्थिति: सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह था कि इस वायुमंडल में मुक्त ऑक्सीजन (free oxygen - O₂) लगभग न के बराबर थी।
पृथ्वी का दूसरा वायुमंडल, जो लगभग 4 से 2.5 अरब वर्ष पहले बना, प्रथम वायुमंडल से काफी अलग था। इसके निर्माण में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ शामिल थीं:
प्रमुख प्रक्रियाएँ (Main Processes):
हाइड्रोजन और हीलियम का अंतरिक्ष में पलायन (Escape of Hydrogen and Helium to Space): पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) हल्का होने के कारण हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसों को रोक नहीं पाया। ये गैसें धीरे-धीरे अंतरिक्ष में चली गईं।
निरंतर ज्वालामुखी गतिविधि (Continued Volcanic Activity): ज्वालामुखीयों से निकलने वाली गैसों ने वायुमंडल की संरचना को बदलना जारी रखा। इसमें जल वाष्प (water vapor), कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide), और नाइट्रोजन (nitrogen) प्रमुख थे, लेकिन अब सल्फर यौगिकों (sulfur compounds) की मात्रा भी बढ़ी।
प्रकाश संश्लेषण का विकास (Evolution of Photosynthesis): यह सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी। लगभग 3.5 अरब वर्ष पहले, साइनोबैक्टीरिया (cyanobacteria - नील-हरित शैवाल) जैसे जीवों ने प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की प्रक्रिया विकसित की। प्रकाश संश्लेषण में, ये जीव कार्बन डाइऑक्साइड और पानी का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से शर्करा (sugar) बनाते हैं, और ऑक्सीजन (oxygen) एक उप-उत्पाद (by-product) के रूप में उत्पन्न होती है।
विशेषताएँ (Characteristics):
ऑक्सीजन का क्रमिक संचय (Gradual Accumulation of Oxygen): प्रकाश संश्लेषण के कारण वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ने लगी। हालांकि, शुरू में यह ऑक्सीजन समुद्रों में घुले हुए लोहे (dissolved iron) के साथ प्रतिक्रिया करके लोहे के ऑक्साइड (iron oxides) बनाती थी, जिससे "बैंडेड आयरन फॉर्मेशन" (banded iron formations - धारीदार लोहे की संरचनाएं) बनीं।
कार्बन डाइऑक्साइड में कमी (Decrease in Carbon Dioxide): प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग होने और चट्टानों के अपक्षय (weathering) में इसके घुलने के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम हो गई।
नाइट्रोजन की प्रधानता (Dominance of Nitrogen): नाइट्रोजन, जो ज्वालामुखीयों से निकली थी और रासायनिक रूप से निष्क्रिय (chemically inert) थी, वायुमंडल में प्रमुख गैस बन गई।
ओजोन परत का गठन(Formation of the Ozone Layer): जैसे ही वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी, ऊपरी वायुमंडल में ओजोन (O₃) का निर्माण शुरू हो गया। ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (ultraviolet radiation - UV rays) को अवशोषित करती है, जिससे पृथ्वी पर जीवन की रक्षा होती है।
जीवन की उत्पत्ति में भूमिका (Role in the Origin of Life):
द्वितीय वायुमंडल ने पृथ्वी पर जीवन के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाईं:
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